सरहद मेरे यारा सरहद ना पार करियो इश्क़ की दो पल खुशियों के बदले मिलेंगे जख्म ताउम्र की मोहब्बत के नाम पे करते है कुछ लोग सौदा हुस्न की खुदा की इनायत है ये मोहब्बत इसे जीस्मो की हवस में ना बदलो ये तौफा दिया है रब ने ज़िन्दगी आसान बनाने के लिए ये मोहब्बत है, और इसे मोहब्बत ही रहने दो ।
साज़िश - ए - इश्क़ मुमकिन नहीं होता छुपाना वो दर्द जिसे हमने ज़िस्मो पे ओढ़ रखा है कैसे भुला दू तेरी दरिदंगी,तूने तो मोहब्बत को हवस का नाम दे रखा है दुआ करूंगी तेरी ख्वाहिश कभी मुकम्मल ना हो अब कोई और तेरी साज़िश में शामिल ना हो वरना उठ जाएगा भरोसा लोगो को मोहब्बत से फिर खुदा भी यही कहेगा अब इस दुनिया में कोई इश्क़ और मोहब्बत ना हो।
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