यादें
मगर फिर भी ज़ेहन से मेरे क्यों वो बात गुजरती नहीं
ज़रा सी उम्र की हज़ारो यादें
आखिर उन यादों के पन्ने पलटते क्यों नहीं
मौसम बदले जगहे बदले
क्यों रातों के सपने बदलते नहीं
डर के सबब से मै जागती रहीं
जो मेरे अंदर था उससे भागती रही
ना ज़वाब मिली ना सुकून मिला
अपने आप से भाग कर
ना मेरे अँखियो को नींद मिली
अर्सो उम्र काट कर।
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Thankyou so much for the appreciation.